कंक्रीट की दीवारों पर कभी बसन्त नहीं आता, ज़रा सोचियेगा :( -
पूरे घर को इंतज़ार है बसन्त चाचा का,
वो हर साल इन्हीं दिनों मिलने आते हैं,
एक पीली सी शर्ट , भीनी खुशबू में लिपटी,
चिरयुवा चेहरा , खुशियाँ बांटती आवाज
यही पहचान है उनकी|
उनके आते ही घर का मौसम बदल जाता था,
हम बच्चे पक्षियों की तरह उनके इर्द-गिर्द लिपटते थे,
कोई कंधे पर तो कोई गोदी पर|
आज सुबह एक बुजुर्ग ने दरवाजे पर दस्तक दी,
बदरंग कपड़े, रुंधा हुआ गला, बासी सी शक्ल
जो कुछ-कुछ बसन्त चाचा से मिलती थी,
ये क्या हाल हुआ उनका, कैसे हुआ, किसने किया?
शायद मैंने,
मैंने ही तरक्की की दौड में उनका घर जला दिया था कभी,
उनके कुछ पालतू मार डाले थे शायद,
जाने-अन्जाने उनको चोट देता गया, और
उनको इस हाल पर पहुंचा डाला मैंने,
न जाने अब कितने दिन और जी सकेंगे वो|
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खैर आप सभी को बसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनायें , माँ सरस्वती का आशीर्वाद हमेशा आपके साथ रहे| बस एक बार इस विषय पर सोचियेगा जरूर :)