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13 Oct 2012

बचपन

शायद ही कोई ऐसा होगा जिसे अपना बचपन वापस नहीं चाहिए -

अगर मांग पाता खुदा से मैं कुछ भी ,

तो फिर से वो बचपन के पल मांग लाता |

वो फिर से मैं करता कोई मीठी गलती ,

वो कोई मुझे ; प्यार से फिर बताता |

वो जिद फिर से करता खिलौनों की खातिर ,

वो फिर से मचलता ; झूलों की खातिर |

वो ललचायी नजरें दुकानों पे रखता ,

वो आँखों से टॉफी के हर स्वाद चखता |

वो बचपन के साथी फिर से मैं पाता ,

वो तुतली जुबाँ में साथ उनके मैं गाता |

वो मालूम न होते जो दुनिया के बंधन ,

वो गर पाक हो पाते इक बार ये मन |

मैं फिर से ये गुम-सुम जवानी न पाता ,

अगर मांग पाता खुदा से मैं कुछ भी ,

तो फिर से वो बचपन के पल मांग लाता ||
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