“बात की आपने ?”
“अभी नहीं , करता हूँ |”
कल से नवरात्रि शुरू हो रहीं थीं | अब दशहरा तक घर में मेले जैसा माहौल रहने वाला था | सभी यार-दोस्तों और जान-पहचान वालों को भी निमंत्रण भिजवा दिया गया | बाहर भी तरह-तरह के पंडाल सज चुके थे | पूरा माहौल ही माँ के रंग में रंगा था | वो दोनों भी जगतजननी अम्बे माँ के बहुत बड़े भक्त थे | पूरा घर बहुत ही सुन्दर तरीके से सजाया गया था | बस एक आखिरी काम बचा था –
“बात की आपने ?”, उसने पूजा की तैयारियों में लगे अपने पति से पूछा |
“अभी नहीं , करता हूँ |”, वो बोला और अपनी जगह से उठकर बाहर बैठक में जाने लगा |
बैठक में सोफे पर एक बुढिया बैठी थी | पुरानी सी सफ़ेद धोती , जिसका पल्लू पीछे से घूमकर सर पर पड़ा हुआ था , चेहरे पर झुर्रियाँ , पूरा शरीर काँपकर अंजाने में ही उसकी उम्र का अंदाजा लगवा रहा था | पास की ही एक अलमारी में एक पुराना , आधा फटा हुआ राज-रतन का झोला रखा हुआ था | उसी के बगल में एक तस्वीर रखी थी , शायद उस बुढिया के जवानी के दिनों की रही होगी | साथ में एक आदमी भी था , शायद उसका पति होगा |
“माँ ?”, वो आदमी उस बुढिया को संबोधित करते हुए बोला |
कोई जवाब नहीं |
“माँ ?”, इस बार कुछ तेज आवाज में , थोडा झुककर |
“हाँ लल्ला ?”, बुढिया ने आँखों में चमक भर के पूछा |
“माँ एक बात है ?”
“का ?”
“तुम बुरा तो नहीं मानोगी ?”
इतना सुनते ही उसकी आँखों की चमक तेजी से कम हो गयी , वापस हिम्मत करके उसने जवाब दिया –
“तुम्हरा काहे का बुरा मनिबे लल्ला |”
लेकिन उस बुजुर्ग दिल में अभी भी एक डर था कि पता नहीं कौन सी बात होगी |
“माँ , तुम नौ दिन किचन के साथ वाले स्टोर रूम में रह जाओ न , असल में बहुत लोग घर में आयेंगे-जायेंगे , तुम्ही को तकलीफ होगी | वहाँ एकांत रहेगा | आराम से मैया की पूजा करना |”
उसने एक पल के लिए स्थिर निगाह से अपने लड़के की तरफ देखा , फिर उसकी नजर वापस उसी अलमारी पर गयी | वहाँ एक और तस्वीर भी रखी थी , उस तस्वीर में वही बुढिया और वही आदमी थे बस साथ में एक बच्चा और था जिसे उस औरत ने गोद में उठा रखा था | बैकग्राउंड में कानपुर का प्रसिद्द तपेश्वरी मंदिर दिख रहा था | वो लोग हर नवरात्रि वहाँ माँ के दर्शन करने और मेला घूमने जाते थे |
उसके होठों पर एक उदासी भरी मुस्कान फ़ैली , उसने अपना झोला उठाया और स्टोर की तरफ चल दी |
“माँ ये तस्वीरें भी लेती जाओ |”, उसके लड़के ने वो सारी पुरानी तस्वीरों को उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा |
वो अपना सारा सामान लेकर स्टोर रूम में पहुँच चुकी थी , उसके लड़के ने अपने घर को बाहर से भीतर तक एक नजर देखा और बोला “नवरात्रि की सजावट तो हो गयी अब बस माँ के स्वागत की तैयारियां करनी हैं |”
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