28 Jul 2013

आकर खुद अनुभव कर जाओ


एक चिट्ठी राम के नाम -


मूरत में बसने वाले राम ,

दुनिया में फिर आ जाओ ,

भूखे कैसे सोते हैं ,

आकर खुद अनुभव कर जाओ |



मगर जन्म लेना अबकी तुम ,

किसी गरीब के घर में ,

बचपन कैसे खोते हैं ,

आकर खुद अनुभव कर जाओ |



मंदिर के भीतर तुम अपनी ,

मूरत पाओगे ; संपन्न-सुखी ,

बाहर बच्चे क्यूँ रोते हैं ,

आकर खुद अनुभव कर जाओ |



रहकर दुनिया में देखो ,

तेरे नाम पे कितने क़त्ल हुए ,

लाशों को कैसे ढोते हैं ,

आकर खुद अनुभव कर जाओ |



एक बार ज़रा तुम भी टूटो ,

हालातों की मुट्ठी में ,

हम हिम्मत कैसे खोते हैं ,

आकर खुद अनुभव कर जाओ |



रामराज्य तो कहीं नहीं ,

रावण से बदतर हालत है ,

फिर भी कैसे खुश होते हैं ,

आकर खुद अनुभव कर जाओ |



भले अँधेरे फैले हों ,

पर दिल में रोज सवेरे के

हम सपने कैसे बोते हैं ,

आकर खुद अनुभव कर जाओ |

.
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2 comments:

  1. आपकी यह रचना कल मंगलवार (30-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  2. Main aapki kavitayen padh nahi paya tha, ab padhi hain, to aap bahut paas nazar aate hain.Badhai aur Shubhkamnayen!Aarakshan par aapke vichar kuchh aur vistaar se janna chahta hoon.

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