13 Dec 2012

दादा - एक गीत


'माली दादा' , काफी प्रचलित शब्द है | ज्यादातर घरों में आप माली को दादा कहते हुए सुनेंगे |
एक माली हमारे घरों में भी होते हैं , जिन्होंने बड़े प्यार और मेहनत से सींचकर हमारे परिवार की फुलवारी बनायी होती है , घर के बुजुर्ग , हमारे 'दादा' -


अंगना की फुलवारी ,
तुमसे बनी थी सारी ,
तुमने ही बीज डारे ,
तुमने की रखवारी ,
फिर क्यूँ खफा हुए ,
हमसे ओ दादा , हो....|
फिर क्यूँ जुदा हुए ,
हमसे ओ दादा , हो....|

चारों तरफ थीं दुआएं तेरी ,
हर पेड़ जैसे हँसता सा था ,
प्यार की थी बारिश उस बाग में ,
हर फूल जैसे महकता सा था ,
रूठी बहार सारी ,
छायी कैसी अंधियारी ,
तेरे बिना यहाँ ,
हमपे ओ दादा , हो....|
क्यूँ तुम खफा हुए ,
हमसे ओ दादा , हो....|

प्यार से बोया था जिन बीज को ,
वही आज नफरत उगलने लगे ,
खून से सींचा था , जिन पेड़ को ,
खून आज वो ही पीने लगे ,
क्या थी खता हमारी ,
फूलों की वो फुलवारी ,
काँटों में बदली क्यूँ , हो....|

अंगना की फुलवारी ,
सूखी पड़ी है सारी ,
संग फिर बहार लाओ ,
फिर वो हवाएं प्यारी ,
फिर से लौट आओ ,
घर अपने दादा , हो....|
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19 comments:

  1. एक माली हमारे घरों में भी होते हैं , जिन्होंने बड़े प्यार और मेहनत से सींचकर हमारे परिवार की फुलवारी बनायी होती है , घर के बुजुर्ग , हमारे 'दादा' -
    शब्‍दश: मन को छूता हर भाव गीत का ... बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  2. क्या कहूँ आकाश....
    भावनाओं की कमी नहीं पाती हूँ तुम्हारी रचनाओं में....
    सुन्दर गीत..

    सस्नेह
    अनु

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  3. बेहद उम्दा प्रस्तुती ... हर चीज की कीमत उसे खो देने के बाद ही मालूम होती है।

     बेतुकी खुशियाँ

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  4. मित्रों!
    13 दिसम्बर से 16 दिसम्बर तक देहरादून में प्रवास पर हूँ!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (16-12-2012) के चर्चा मंच (भारत बहुत महान) पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  5. अगर लौटा लाएँ हम जाने वालों को
    तो फ़िर आँगन सजे और खिले क्यारी-क्यारी हो....

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  6. what a beautiful line..
    संग फिर बहार लाओ ,
    फिर वो हवाएं प्यारी ,
    फिर से लौट आओ ,
    घर अपने दादा , हो....
    thnx for sharing.......Akash bhai

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (21-12-2012) के चर्चा मंच-११०० (कल हो न हो..) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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  8. बहुत खूब भईया...गहरे भाव से सजी सुंदर गीत...

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  9. बहुत सुंदर मार्मिक रचना ,जाने के बाद बही याद आते हैं अपने

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  10. दिल से लिखते हो..सच लिखते हो..अच्छा तो हो ही जायेगा..शुभकामनाएँ।

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  11. एक-एक शब्द में दर्द भरा हुआ है.... बहुत दुख हो रहा है.... :(
    ~God Bless !!!

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  12. बड़े ही मासूम अपनत्व से भरपूर ख्याल

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  13. बहुत बढ़िया.....सुन्दर रचना...

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  14. Umda Rachna....
    http://ehsaasmere.blogspot.in/

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  15. क्यूँ खफा हो गए दादा जी ....?

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    1. नहीं हरकीरत जी मेरे घर में सब खुशहाल है , ये सिर्फ एक कल्पना है | :)

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  16. Very touching creation ! Thanks Akash ji.

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